यक़ीं तो ये है वो ख़त का जवाब लिक्खेंगे
मगर नविश्ता-ए-क़िस्मत किसी को क्या मालूम
“I am certain indeed that a reply to my letter shall be penned, yet what fate has inscribed, who can ever know?”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
मुझे पूरा भरोसा है कि वे मेरे ख़त का जवाब ज़रूर लिखेंगे, लेकिन तक़दीर में क्या लिखा है यह कोई नहीं जानता।
विस्तार
इस शेर में उम्मीद और अनजानी आशंका के बीच की कशमकश बहुत खूबसूरती से बयां हुई है। आशिक़ को अपने महबूब की वफ़ा और नीयत पर पूरा भरोसा है कि उनका ख़त ज़रूर आएगा। मगर साथ ही क़िस्मत के लिखे का एक धीमा सा डर भी है—क्योंकि इंसान जो लिखना चाहता है, तक़दीर अक्सर उसके उलट अपनी ही दास्तान लिख देती है।
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