आए हैं आप ग़ैर के घर से खड़े खड़े ये और को जताइए एहसान, जाइए

“Fresh from the rival's door, you pause here on your feet; go bestow this favor on someone else—take your leave, depart.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

आप ग़ैर के घर से सीधे आए हैं और यहाँ बस खड़े-खड़े ही मिल रहे हैं; यह एहसान किसी और पर जताइए और अब यहाँ से चले जाइए।

विस्तार

इस शेर में प्रेमी का रूठा हुआ स्वाभिमान और गहरा तंज़ साफ़ झलकता है। महबूब रक़ीब के घर से वक़्त बिताकर बस रस्म अदायगी के लिए चौखट पर खड़ा हुआ है, मानो यहाँ आकर कोई बड़ा अहसान कर रहा हो। आशिक़ को यह बेदिली और झूठी तवज्जो गवारा नहीं, इसलिए वह भरे दिल से साफ़ कह देता है कि यह दिखावटी मेहरबानी किसी और पर आज़माइए और यहाँ से चले जाइए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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