आप का ए'तिबार कौन करे रोज़ का इंतिज़ार कौन करे

“Who could ever place their trust in you? / Who would wait for you day after day?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

आप पर कौन भरोसा करे और रोज़-रोज़ आपका इंतज़ार कौन करता रहे?

विस्तार

यह शेर इश्क़ की उस थकन और मीठी नाराज़गी को बयां करता है, जहाँ महबूब के झूठे वादों से दिल ऊब चुका है। यहाँ कोई भारी-भरकम शिकवा नहीं, बल्कि एक साफ़ और बेबाक तंज़ है कि रोज़-रोज़ की झूठी उम्मीदों पर अब कौन अपनी जान सुखाए। शायर अपनी बेबसी को एक स्वाभिमान में बदल देता है, जैसे कह रहा हो कि मोहब्बत अपनी जगह, लेकिन रोज़ का यह इम्तिहान अब गवारा नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

1 / 10Next →