“Upon my lashes hang not merely fragments of my bleeding heart, O friends; strung on this thread, they gleam as beads of Yemeni carnelian.”
हे दोस्तो, मेरी पलकों पर सिर्फ़ मेरे जिगर के टुकड़े ही नहीं आँसुओं के रूप में मौजूद हैं, बल्कि पलक रूपी इस धागे में पिरोए जाकर वे यमनी अक़ीक़ की लड़ी बन गए हैं।
इस शेर में शायर ने अपने गहरे दर्द को एक बेहद ख़ूबसूरत मंज़र में ढाला है। वे दोस्तों से कहते हैं कि पलकों पर ठहरे हुए ये ख़ूनी आँसू सिर्फ़ जिगर के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि पलक रूपी धागे में पिरोए गए यमन के क़ीमती सुर्ख़ अक़ीक़ (रत्न) जैसे चमक रहे हैं। यहाँ ग़म और अश्कों की शिद्दत को इतनी नफ़ासत से पिरोया गया है कि दिल की तकलीफ़ भी एक नायाब ख़ूबसूरती का रूप ले लेती है।
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