“After begging for a kiss, it is union that I crave; there stirs yet another desire in this beggar's heart.”
बोसे (चुंबन) की माँग के बाद अब मुझे मिलन की इच्छा है; इस याचक के दिल में यह एक और तमन्ना मौजूद है।
यहाँ आशिक़ खुद को प्यार की चौखट पर खड़ा एक ऐसा 'साइल' यानी भिखारी बताता है, जिसकी हसरत कभी खत्म नहीं होती। उसने पहले तो महबूब से सिर्फ एक बोसे (चुंबन) की इल्तिजा की थी, मगर दिल का मासूम लालच देखिए कि अब वह मुकम्मल वस्ल (मिलन) की तलब करने लगा है। यह शेर इश्क़ की उस दिलकश फितरत को बयान करता है, जहाँ चाहत का दायरा कभी सिमटता नहीं, बल्कि हर छोटी इनायत एक बड़ी आरज़ू को जन्म दे देती है।
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