पहले तो मिलता है दिलदारी से क्या क्या दिलरुबा बाँधता मंसूबे फिर वो मिल के दिल में और है

“At first with such fond tenderness the charmer comes to meet, yet having met, what different schemes within that heart compete!”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

पहले तो महबूब बड़ी दिलदारी और मुहब्बत से मिलता है, लेकिन मुलाकात के बाद वह दिल में कुछ और ही इरादे या मंसूबे बनाता है।

विस्तार

इस शेर में महबूब की दिलकश अदाओं और उसकी चालाकी का बड़ा ही चुटीला बयान है। आशिक़ कहता है कि शुरू में तो महबूब बेपनाह प्यार और गर्मजोशी से मिलता है, जिससे दिल बहल जाता है, लेकिन मिलते ही उसके ज़ेहन में न जाने क्या-क्या नए मंसूबे और खिचड़ी पकने लगती है। यह प्यार में उस मीठी उलझन को दर्शाता है जहाँ बाहर से तो अपनापन दिखता है, मगर अंदर दिल की बाज़ी पलटने की तैयारी चल रही होती है।

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