गो वो महफ़िल में न बोला पा गए चितवन से हम आज कुछ उस रौनक़-ए-महफ़िल के दिल में और है

“Though she uttered not a word in the gathering, her glance made it known: / Today, in the heart of the assembly's life, a different thought has grown.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

यद्यपि वह महफ़िल में कुछ नहीं बोले, लेकिन उनकी चितवन से हम जान गए कि आज उस महफ़िल की रौनक़ के दिल में कुछ और ही बात चल रही है।

विस्तार

भरी महफ़िल में जब ज़ुबान खामोश रहती है, तब नज़रें दिल का सारा हाल बयां कर देती हैं। शायर कहता है कि महफ़िल की जान यानी उसका महबूब चाहे एक लफ़्ज़ भी न बोला हो, लेकिन उसकी चितवन ने यह राज़ खोल दिया कि आज उसके दिल में कुछ अलग ही कशमकश या एहसास चल रहा है। यह शेर ख़ामोशी की उस अनकही ज़बान को छूता है, जिसे सिर्फ़ मोहब्बत करने वाले ही समझ सकते हैं।

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