नाख़ुन करें हैं ज़ख़्मों को दो दो मिला के एक थे आठ दस सो हो गए अब छिल के चार पाँच

“My fingernails merge every wound, joining two into one; once eight or ten, now scratched raw, only four or five remain.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

नाख़ून खुरच कर दो-दो ज़ख़्मों को मिलाकर एक कर रहे हैं; पहले जो आठ-दस ज़ख़्म थे, अब छिलकर आपस में मिलकर चार-पाँच बड़े ज़ख़्म रह गए हैं।

विस्तार

यहाँ आशिक़ अपने जुनून और दर्द की उस इंतेहा पर है जहाँ वह बेतहाशा अपने सीने के ज़ख़्मों को खुरच रहा है। इस बेखुदी का आलम यह है कि दो-दो ज़ख़्म छिलकर आपस में मिल गए हैं, जिससे उनकी गिनती भले घट गई हो, लेकिन दर्द का दायरा और बढ़ गया है। मीर ने यहाँ एक गहरा तंज़ किया है—ज़ख़्म कम नहीं हुए, बल्कि मिलकर और बड़े और जानलेवा नासूर बन गए हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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