न उस का भेद यारी से न अय्यारी से हाथ आया ख़ुदा आगाह है दिल की ख़बरदारी से हाथ आया

“Nor through friendship nor by cunning was that secret attained; God is witness, only through the heart's vigilance was it gained.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

उसका रहस्य न तो दोस्ती से पता चला और न ही चालाकी से हासिल हुआ; ईश्वर गवाह है कि वह केवल दिल की सतर्कता और सजगता से प्राप्त हुआ।

विस्तार

इस शेर में शायर कहते हैं कि महबूब या हक़ीक़त का गहरा राज़ न तो सिर्फ़ दोस्ती के भरोसे मिला और न ही किसी चतुराई या चालाकी से हासिल हुआ। ख़ुदा गवाह है कि यह भेद केवल दिल की गहरी सजगता, संवेदनशीलता और रूहानी बेदारी से ही हाथ आया। शायर बहुत साफ़गोई से समझाते हैं कि ज़िंदगी की असल सच्चाइयों को दिमाग़ के दांव-पेंचों से नहीं, बल्कि जागे हुए दिल से ही महसूस किया जा सकता है।

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