क्या चल सकेगा हम से कि पहचानते हैं हम तू लाख अपनी चाल को ज़ालिम बदल के चल

“What trick of yours could work on me, when I know you through and through? Though you, cruel one, a hundred thousand times should change your artful stride.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

हम तुम्हें अच्छी तरह पहचानते हैं, इसलिए तुम्हारी कोई भी चाल हम पर नहीं चल सकती; ऐ ज़ालिम, तुम चाहे अपनी चाल लाख बार बदल लो।

विस्तार

इस शेर में 'चाल' लफ़्ज़ की ख़ूबसूरती देखते ही बनती है, जिसका मतलब महबूब का दिलकश अंदाज़-ए-रफ़्तार भी है और उसका कोई फ़रेब या दांव भी। आशिक़ अपने ज़ालिम माशूक़ से बड़े नाज़ और बेबाक यक़ीन के साथ कह रहा है कि तुम चाहे जितने नए तरीक़े आज़मा लो, हमारे सामने तुम्हारी कोई चालाकी नहीं चलेगी क्योंकि हम तुम्हें रूह तक पहचानते हैं। यह इश्क़ का वह मुक़ाम है जहाँ महबूब का हर नख़रा और हर साज़िश अपने चाहने वाले के सामने बिल्कुल खुली किताब बन जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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