फिर आँखें भी तो दीं हैं कि रख देख कर क़दम कहता है कौन तुझ को न चल चल सँभल के चल

“Yet eyes were given too, that you might watch your step; who tells you not to walk? Walk on, but walk with care.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

तुम्हें आँखें भी तो दी गई हैं ताकि तुम देख-भाल कर क़दम रखो। तुमसे कौन कहता है कि मत चलो, ज़रूर चलो लेकिन सँभल कर चलो।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी और मोहब्बत के रास्ते पर चलने का एक बहुत ख़ूबसूरत फलसफ़ा सिखाता है। शायर कहता है कि ठोकरों के डर से सफ़र रोक देना समझदारी नहीं, बल्कि ख़ुदा ने जो आँखें और समझ दी हैं, उनका इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। आपको चलने से कोई मना नहीं कर रहा, बस इतनी गुज़ारिश है कि होशमंदी और सँभलकर क़दम बढ़ाइए ताकि मंज़िल तक सलामत पहुँच सकें।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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