“He Himself fashioned man as a wind-up puppet, / And He Himself commands the clockwork doll to walk.”
ईश्वर ने इंसान को स्वयं कल (मशीन) का पुतला बनाया है, और फिर वह खुद ही उस पुतले को चलने का हुक्म भी देता है।
इस शेर में शायर क़िस्मत और इंसान की आज़ादी के द्वंद्व को बड़ी नज़ाकत से बयां करता है। ख़ुदा ने इंसान को चाबी से चलने वाले एक खिलौने की तरह बनाया है, और फिर उसी पुतले को अपनी मर्जी से चलने का हुक्म भी वही देता है। यह हमारी लाचारी और ज़िंदगी के उस अजीब विरोधाभास को छूता है, जहाँ सारी डोर ऊपर वाले के हाथ में है, फिर भी हर क़दम की जवाबदेही हमारी मानी जाती है।
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