इंसाँ को कल का पुतला बनाया है उस ने आप और आप ही वो कहता है पुतले को कल के चल

“He Himself fashioned man as a wind-up puppet, / And He Himself commands the clockwork doll to walk.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

ईश्वर ने इंसान को स्वयं कल (मशीन) का पुतला बनाया है, और फिर वह खुद ही उस पुतले को चलने का हुक्म भी देता है।

विस्तार

इस शेर में शायर क़िस्मत और इंसान की आज़ादी के द्वंद्व को बड़ी नज़ाकत से बयां करता है। ख़ुदा ने इंसान को चाबी से चलने वाले एक खिलौने की तरह बनाया है, और फिर उसी पुतले को अपनी मर्जी से चलने का हुक्म भी वही देता है। यह हमारी लाचारी और ज़िंदगी के उस अजीब विरोधाभास को छूता है, जहाँ सारी डोर ऊपर वाले के हाथ में है, फिर भी हर क़दम की जवाबदेही हमारी मानी जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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