ये ग़ोल-वश हैं इन को समझ तू न रहनुमा साए से बच के अहल-ए-फ़रेब-व-दग़ल के चल

“Do not mistake these ghoul-like phantoms for guides upon your way; shun even the shadow of those who practice deceit and betray.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

ये लोग भटकाने वाले पिशाचों की तरह हैं, इन्हें अपना मार्गदर्शक मत समझो। धोखेबाज़ और कपटी लोगों की परछाईं से भी बचकर चलो।

विस्तार

शायर यहाँ ज़िंदगी के सफ़र में हमसफ़र और रहबर चुनने को लेकर एक बहुत सच्ची सलाह दे रहे हैं। पुरानी कहानियों में 'ग़ोल' ऐसे छलिया साए होते थे जो मुसाफ़िरों को रास्ता भटका देते थे; शायर कहते हैं कि फ़रेबी लोग भी रहनुमा का भेष बदलकर धोखा देते हैं। इसलिए नसीहत यही है कि ऐसे दगाबाज़ इंसानों के तो साए से भी दूर रहो, ताकि तुम्हारा अपना रास्ता कभी भटके नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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