क्या होगा रफ़ूगर से रफ़ू मेरा गरेबान ऐ दस्त-ए-जुनूँ तू ने नहीं तार भी छोड़ा

“How could the darner ever mend the collar of my robe? O hand of frenzy, you have left not even a single thread!”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

रफ़ू करने वाला मेरे फटे गरेबान को कैसे सी पाएगा, क्योंकि ऐ दीवानगी के हाथ, तूने तो उसमें एक धागा भी बाकी नहीं छोड़ा है।

विस्तार

उर्दू शायरी में गरेबान का फटना दीवानगी और बेपनाह दर्द की निशानी है, और रफ़ूगर वह हमदर्द है जो जख्मों को सीने की कोशिश करता है। शायर कहता है कि जुनून की हद यह थी कि उसने कुर्ते का एक धागा तक साबुत नहीं छोड़ा, जिसे जोड़कर कुछ मरम्मत की जा सके। यह शेर दिल की उस मुकम्मल बर्बादी को दिखाता है, जहाँ दर्द इस हद तक पहुँच चुका है कि अब कोई भी तसल्ली या इलाज मुमकिन नहीं रहा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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