यही तंग हाल जो सब का है ये करिश्मा क़ुदरत-ए-रब का है जो बहार थी सो ख़िज़ाँ हुई जो ख़िज़ाँ थी अब वो बहार है

“This straitened plight that burdens all is a wonder of God's decree: what once was spring has turned to autumn, and what was autumn now blooms anew.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

आज सब लोगों का जो यह बुरा और तंग हाल है, यह ईश्वर की कुदरत का करिश्मा है; जो पहले बहार थी वह अब पतझड़ बन चुकी है और जो पतझड़ था वह अब बहार बन गया है।

विस्तार

शायर यहाँ ज़िंदगी के बदलते हुए रंगों और वक़्त के फेर को बहुत सादगी से बयां कर रहे हैं। बहार और ख़िज़ाँ (पतझड़) के रूपक से वे समझाते हैं कि आज जो तंगहाली हर तरफ़ नज़र आ रही है, वह क़ुदरत के निज़ाम का ही एक हिस्सा है जहाँ हालात कभी एक जैसे नहीं रहते। जो कल उजड़ा हुआ था वह आज फल-फूल रहा है, और जो कभी आबाद था वह वीरान हो गया है—यह शेर हमें सब्र और बदलाव की शाश्वत सच्चाई सिखाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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