कर ले ऐ दिल जान को भी रंज-ओ-ग़म में तू शरीक ये जो मेहनत तुझ पे है कुछ कुछ मगर बट जाएगी

“O heart, make life a partner in your grief and sorrow too / This heavy burden weighing on you will at least be partly shared.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

ऐ दिल, तू अपनी जान को भी अपने दुःख-दर्द में शामिल कर ले, ताकि तेरे ऊपर पड़ा यह भारी बोझ और तकलीफ़ थोड़ी बँट सके।

विस्तार

यहाँ शायर अपने दिल से एक बहुत ही मासूम और दर्द भरी बातचीत कर रहा है। वह दिल को समझाता है कि अकेले सारा ग़म सहने के बजाय अपनी जान यानी जिस्म और रूह को भी इस दर्द में साझीदार बना ले। जब ग़म का यह भारी बोझ दिल और जान आपस में बाँट लेंगे, तो दिल की तन्हाई और तकलीफ थोड़ी हल्की हो जाएगी।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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