“Those who torment another, grinding lentils on their chest, just wait and see: O Zafar, among their very shoes, their own broth divided shall be.”
ऐ ज़फ़र, जो लोग दूसरों को तंग करते हैं और उनकी छाती पर मूँग दलते हैं, देख लेना एक दिन उनके अपनों में ही फूट पड़ जाएगी और वे आपस में लड़ मरेंगे।
इस शेर में ज़फ़र ने दो मशहूर मुहावरों का बड़ा खूबसूरत इस्तेमाल करके कर्म के अटल इंसाफ़ की बात की है। जो लोग आज दूसरों को जान-बूझकर सताते हैं और उनकी छाती पर मूँग दलते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होने वाला है। एक दिन उनका घमंड टूटेगा और उनके अपनों में ही ऐसी फूट पड़ेगी कि जूतियों में दाल बँटेगी। यह शेर हमें तसल्ली देता है कि ज़ुल्म और अहंकार की उम्र बहुत छोटी होती है।
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