“Look at the vibrant blossoms springing from the dust; worthless though it seems, what wonders lie within!”
देखो कि इस धूल और मिट्टी से कैसे रंग-बिरंगे फूल पैदा होते हैं; वैसे तो मिट्टी बिल्कुल तुच्छ और नाचीज़ लगती है, मगर इसके भीतर कैसी अद्भुत चीज़ें छिपी हैं।
शायर हमें उस मिट्टी की तरफ देखने को कह रहे हैं, जिसे हम आम तौर पर बेकदर और मामूली समझते हैं। लेकिन उसी ख़ाक के सीने से जब रंग-बिरंगे और दिलकश फूल खिलते हैं, तो समझ आता है कि उसके भीतर क्या-क्या चमत्कार छुपे हुए हैं। यह शेर हमें याद दिलाता है कि किसी को भी बाहरी सादगी देखकर नाचीज़ नहीं समझना चाहिए, क्योंकि सबसे गहरी सुंदरता अक्सर सबसे विनम्र जगहों से ही जन्म लेती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
