ताज-ए-ज़र के लिए क्यूँ शम्अ का सर काटे है रिश्ता-ए-उल्फ़त-ए-परवाना को गुल-गीर न तोड़

“Why sever the candle's head merely for a crown of gold? / O snuffer, do not break the moth's tender thread of love.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

सोने के ताज (लौ) के लिए शमा का सिर क्यों काटते हो? ऐ गुलगीर (बत्ती कतरने वाले), परवाने के प्यार के रिश्ते को मत तोड़ो।

विस्तार

शायर यहाँ बत्ती तराशने वाले गुल-गीर से कहता है कि ज़रा से सुनहरे अंगारे या सोने के ताज की खातिर तू शम्अ का सिर क्यों काट रहा है? ऐसा करके तू उस बेचारे परवाने के इश्क़ का नाज़ुक धागा तोड़ रहा है, जो इसी लौ के इर्द-गिर्द अपनी जान न्योछावर करने आया था। यह शेर दुनिया के उस बेदर्द और लालची रवैये पर चोट करता है, जो अपने मामूली नफ़े के लिए किसी की रूहानी और पाकीज़ा मोहब्बत को बेरहमी से तबाह कर देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.