जो दोस्त हो तो कहूँ तुझ से दोस्ती की बात तुझे तो मुझ से अदावत कहूँ तो किस से कहूँ

“Were you a friend, I would speak to you of friendship's grace; but you harbor enmity toward me—to whom then should I plead my case?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

अगर तुम दोस्त होते तो मैं तुमसे दोस्ती की बात करता, लेकिन तुम्हें तो मुझसे दुश्मनी है; ऐसे में मैं अपनी बात किससे कहूँ?

विस्तार

यह शेर उस बेबसी और अकेलेपन का दर्द बयां करता है जब आपका सबसे अज़ीज़ ही आपका मुख़ालिफ़ बन जाए। इंसान ज़िंदगी की सारी शिकायतें और दिल का हाल अपने दोस्त के सामने ही रखता है, मगर यहाँ तकलीफ़ देने वाला भी वही है। शायर बड़ी लाचारी से यह सवाल पूछता है कि जब अपना ही बेगाना हो जाए, तो दिल का रोना रोने इंसान आख़िर किसके पास जाए?

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