ले गया छीन के कौन आज तिरा सब्र ओ क़रार बे-क़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी

“Who has robbed you of your calm and peace today? / O heart, never before were you restless in this way.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

आज तुम्हारा सब्र और चैन कौन छीनकर ले गया है? ऐ दिल, तुझमें पहले कभी ऐसी बेचैनी तो नहीं थी।

विस्तार

शायर यहाँ अपने ही दिल से एक हमदर्द दोस्त की तरह मुख़ातब है और उसकी बेपनाह बेचैनी पर हैरान है। दिल ने पहले भी इश्क़ की तड़प सही है, मगर आज का ये इज़्तिराब कुछ अलग है—मानो किसी ने उसका सारा सब्र और सुकून पल भर में लूट लिया हो। यह शेर मोहब्बत के उस पुरअसर लम्हे को बयां करता है, जहाँ इंसान अपने ही मचलते जज़्बातों के सामने पूरी तरह बेबस हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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