करते थे पहाड़ का दावा पलाश भी,आई जो पतझड़ तो झड़े पत्ते निकले।
“Even the Palash claimed a mountain's grand array,But with autumn's arrival, just fallen leaves held sway.”
— अमृत घायल
अर्थ
पलाश का वृक्ष भी पहाड़ होने का दावा करता था, लेकिन जब पतझड़ आया, तो उसके पत्ते गिर गए।
विस्तार
यह शेर दावों और सच्चाई की प्रकृति पर बात करता है। पलाश का दावा था कि वह पहाड़ जैसा है, यानी बहुत मजबूत और स्थायी है। लेकिन जब पतझड़ आया, तो उसका दिखावा टूट गया और पत्ते झड़ गए। शायर हमें याद दिला रहे हैं कि समय और वास्तविकता के आगे कोई भी दावा या भ्रम नहीं टिक सकता।
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