“Union rests in the hands of fate, O sovereign of the fair; as for us, we thirst only for your love.”
हे सुंदरों के बादशाह, हमारा मिलन तो भाग्य के हाथ में है, हम तो यहाँ केवल आपके प्रेम के प्यासे हैं।
इस शेर में आशिक़ अपने महबूब—हुस्न के सुल्तान—से बड़ी सादगी से कहता है कि मिलना या न मिलना तो क़िस्मत की बात है, जिस पर हमारा कोई ज़ोर नहीं। लेकिन हमारी तलब किसी जिस्मानी मिलन या हासिल करने की शर्त से बहुत ऊपर है; हम तो सिर्फ़ तुम्हारी मोहब्बत की एक बूँद के प्यासे हैं। यह शेर इश्क़ को उम्मीद और शिकवे से आज़ाद करके एक पाकीज़ा और रूहानी समर्पण में बदल देता है।
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