खेलना आता है हम को भी शिकार पर नहीं ज़ाहिद कोई टट्टी की आड़

“We too know well how to pursue the game, Yet hunt behind no pious blind, O preacher.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

ऐ ज़ाहिद! शिकार खेलना हमें भी आता है, लेकिन हम छिपने के लिए किसी आड़ या ओट का सहारा नहीं लेते।

विस्तार

शायर यहाँ ज़ाहिद यानी ख़ुद को नेक समझने वाले धर्मगुरु पर बहुत ही चुटीला तंज़ कर रहे हैं। पुराने दौर में शिकारी शिकार को चकमा देने के लिए बाँस या सरकंडों के परदे (टट्टी की आड़) का सहारा लेते थे, जिसे यहाँ पाखंड और दिखावे का प्रतीक बनाया गया है। शायर साफ़ कहते हैं कि दुनियावी चाहतों का खेल खेलना हमें भी आता है, मगर हम तुम्हारी तरह दिखावे और पाखंड का मुखौटा पहनकर कोई छल-कपट नहीं करते।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.