आज तक क़स्र-ए-अमल है ना-तमाम बंध चुकी है बार-हा खुल खुल के पाड़

“To this day the palace of deeds remains incomplete, though time and again the scaffolding has been raised and torn down.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

आज तक कर्मों का महल अधूरा ही है, हालाँकि उसके निर्माण के लिए कई बार पाड़ बाँधकर खोली जा चुकी है।

विस्तार

शायर ने यहाँ ज़िंदगी और अरमानों की तुलना एक ऐसे महल से की है, जिसका निर्माण कभी पूरा नहीं हो पाता। हम उम्मीदों और कोशिशों की बल्लियाँ (पाड़) बार-बार बाँधते हैं और वे बार-बार ढहती या खुलती रहती हैं, मगर ख़्वाबों की यह इमारत अधूरी ही रह जाती है। यह शेर इंसान की उन अंतहीन तमन्नाओं, निरंतर संघर्ष और कभी न पूरी होने वाली हसरतों की एक बेहद मार्मिक तस्वीर पेश करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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