कल ख़राबात में इक गोशे से आती थी सदा दिल में सब कुछ है मगर रुख़्सत-ए-गुफ़्तार नहीं

“Yesterday from a corner of the tavern arose a cry: the heart holds all within, yet speech has been denied.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

कल मयखाने के एक कोने से यह आवाज़ आ रही थी कि दिल में तो सब कुछ मौजूद है, मगर बोलने की इजाज़त नहीं है।

विस्तार

मैख़ाने के एक तन्हा कोने से उठती यह सदा उस दर्द को छूती है जिसे हम सब कभी न कभी महसूस करते हैं। दिल में जज़्बातों, गहरे दर्दों और सच्चाइयों का पूरा समंदर उमड़ रहा है, मगर दुनिया या हालात ने लब खोलने की इजाज़त छीन ली है। यह शेर उस बेबस घुटन को बयां करता है, जहाँ सीने में एक तूफ़ान दबा हो लेकिन ज़ुबान पर मजबूरन ख़ामोशी का पहरा हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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