ख़ूब-रूई के लिए ज़िश्ती-ए-ख़ू भी है ज़रूर सच तो ये है कि कोई तुझ सा तरह-दार नहीं

“A bitter temper is a must to set off beauty's face; the truth is this: no one can match your captivating grace.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

खूबसूरती को उभारने के लिए स्वभाव में थोड़ी कड़वाहट या बदमिज़ाजी भी ज़रूरी होती है, और सच तो यह है कि आपके जैसा दिलकश और सलीकेदार कोई नहीं है।

विस्तार

यहाँ शायर महबूब की तीखी मिज़ाजी और नख़रों को भी उसकी ख़ूबसूरती का हिस्सा मानकर एक अनोखी तारीफ़ कर रहा है। उसका कहना है कि बेमिसाल हुस्न को मुकम्मल होने के लिए थोड़े से ग़ुरूर या तल्ख़ी की भी ज़रूरत होती है, जैसे चाँद पर दाग़ उसकी चमक को और गहरा कर देता है। सच तो यह है कि आशिक़ को महबूब का यह तीखापन खटकता नहीं, बल्कि उसे दुनिया में सबसे जुदा और दिलकश बना देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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