मिलते ग़ैरों से हो मिलो लेकिन हम से बातें करो सफ़ाई की

“Go on, consort with rivals if you must, but speak with me, at least, in candid truth.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

आप दूसरों से मिलते हैं तो बेशक मिलिए, लेकिन कम से कम हमसे तो साफ़-साफ़ और ईमानदारी से बात कीजिए।

विस्तार

यहाँ शायर अपने महबूब से कोई पाबंदी या शिकायत नहीं कर रहा, बल्कि सीधे-सीधे सच्चाई की गुज़ारिश कर रहा है। उसे इस बात से भी उतना दर्द नहीं कि महबूब दूसरों से मिलता है, जितना इस बात से कि वह उससे अपनी नज़रें या सच चुराता है। यह शेर मोहब्बत में उस मोड़ की बात करता है जहाँ बेरुख़ी से ज़्यादा ढोंग और छल तकलीफ देता है, इसलिए शायर बस इतना चाहता है कि रिश्ता जैसा भी हो, उसमें साफ़गोई और ईमानदारी बनी रहे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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