मुँह कहाँ तक छुपाओगे हम से तुम को आदत है ख़ुद-नुमाई की

“How long can you hide your face from me? / When revealing yourself is second nature to you.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

तुम मुझसे अपना चेहरा कब तक छुपाओगे, जबकि तुम्हें तो खुद को दिखाने और प्रदर्शित करने की आदत है।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने महबूब से बड़ी शोख़ी और लाड़ से कह रहा है कि तुम आख़िर कब तक पर्दा करोगे। हुस्न की तो फ़ितरत ही यही है कि वो अपनी ख़ूबसूरती का जलवा दिखाए और तारीफ़ पाए, इसलिए तुम्हारा यह छुपना महज़ एक दिखावा है। सूफ़ी नज़रिए से देखें तो यह उस मालिक के जमाल का भी बयान है, जो कायनात के हर ज़र्रे में ख़ुद को ज़ाहिर करने से ख़ुद को रोक नहीं सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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