“Why deepen this intimacy so much? / I do not have the strength to bear separation.”
तुम इतना मेल-जोल और नज़दीकियाँ क्यों बढ़ा रहे हो? मुझमें जुदाई का दर्द बर्दाश्त करने की ताक़त नहीं है।
इस शेर में इश्क़ की एक बहुत नाज़ुक और सच्ची कशमकश बयां हुई है। शायर अपने महबूब से ज़्यादा नज़दीकियाँ न बढ़ाने की गुज़ारिश करता है, नफ़रत की वजह से नहीं, बल्कि इस डर से कि जितनी गहरी मोहब्बत होगी, बाद में बिछड़ने का सदमा उतना ही जानलेवा होगा। यह दिल की उस लाचारी की आवाज़ है जो पहले से ही जानता है कि वह जुदाई का भारी बोझ उठाने की ताक़त नहीं रखता।
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