सोहबत-ए-गाह-गाही-ए-रश्की तू ने भी हम से बेवफ़ाई की

“O fleeting companionship born of envy, / Even you have broken faith with me.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

ऐ रश्की की कभी-कभार मिलने वाली सोहबत, तूने भी आख़िरकार हमसे बेवफ़ाई कर ली।

विस्तार

इस शेर में शायर उन चंद पलों की मुलाक़ातों और कभी-कभार मिलने वाली सोहबत को याद कर रहा है, जो उसके जीने का सहारा थीं। वह बड़े दर्द भरे अंदाज़ में कहता है कि उस कभी-कभार के साथ ने भी आख़िरकार बेवफ़ाई कर दी और दामन छुड़ा लिया। यह उस अकेलेपन की दास्तान है, जहाँ इंसान से उम्मीद और तसल्ली का आख़िरी छोटा सा तिनका भी छिन जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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