“O fortune of this mad lover's shared tale, in the end, you only fell short of the mark.”
अपने प्रेम की कहानी के भाग्य को संबोधित करते हुए कवि कहता है कि अंत में तूने असफलता ही दी और मुझे मंज़िल तक नहीं पहुँचने दिया।
इस शे'र में आशिक़ अपनी ही क़िस्मत से एक गहरी और दर्दभरी शिकायत कर रहा है। उसने महबूब के साथ मिलकर मोहब्बत की एक मुकम्मल दास्तान लिखने का ख़्वाब देखा था, मगर नसीब ने ऐन वक़्त पर साथ छोड़ दिया और मंज़िल तक पहुँचने न दिया। यह सिर्फ़ वियोग का दर्द नहीं, बल्कि उस लाचारी का इज़हार है जहाँ दिल के जज़्बात तो सच्चे थे, लेकिन मुक़द्दर की पहुँच ही छोटी पड़ गई।
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