“Hari is other than Akha, it is true, As from the mountain, water flows through.”
हरि अखा से भिन्न हैं, जैसे पर्वत से पानी बहता है।
यह सुंदर दोहा कवि अखा द्वारा ईश्वर के बारे में एक गहरा सत्य बताता है। यह कहता है "अखा से ही दूसरा हरि (ईश्वर) प्रकट होता है, जैसे पर्वत से सहज ही पानी बहता है।" अखा का सुझाव है कि परमात्मा कोई दूर या बाहरी सत्ता नहीं है, बल्कि हमारे अस्तित्व का एक आंतरिक हिस्सा है, या वह एक सिद्ध आत्मा के माध्यम से प्रकट होता है। जैसे पर्वत के हृदय से स्वाभाविक रूप से जलधारा फूटती है, वैसे ही ईश्वर की उपस्थिति, ज्ञान या कृपा हमारे भीतर से सहज और स्वाभाविक रूप से प्रकट होती है। यह हमें परमात्मा को भीतर खोजने और उसकी प्राकृतिक व सदा-उपस्थित अभिव्यक्ति को पहचानने के लिए प्रेरित करता है।
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