અખા એમ હલકાથી ભારે હોય આત્મજ્ઞાન મૂળગું તે ખોય.

“Akha, thus from light, it becomes heavy,The root of self-knowledge, thereby, is lost.”

— अखा भगत
अर्थ

अखा कहते हैं कि जब व्यक्ति हल्की बातों से भारी हो जाता है, तो वह आत्मज्ञान का मूल आधार खो देता है।

विस्तार

अखा कहते हैं कि जब हम सतही बातों में उलझ जाते हैं या अपनी वास्तविकता से ज़्यादा महत्वपूर्ण दिखने की कोशिश करते हैं, तो हम अपने मौलिक आत्मज्ञान से भटक जाते हैं। सच्ची समझ बाहरी दिखावे या केवल बौद्धिक अहंकार से नहीं आती, बल्कि अपने आंतरिक स्वरूप को जानने से आती है। वे जोर देते हैं कि यदि हम जीवन के 'हल्के' या तुच्छ पहलुओं को प्राथमिकता देते हैं, उन्हें गलती से 'भारी' या महत्वपूर्ण मान लेते हैं, तो हम उस गहरे आत्म-ज्ञान से संपर्क खो देते हैं जो स्वाभाविक रूप से हमारा है।

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