“Whenever a dispute breaks out between the rival and me, / Behind the veil, deep in your heart, you secretly side with him.”
जब कभी हमारे और ग़ैर के बीच कोई झगड़ा या बहस होती है, तब तुम दिल ही दिल में पर्दे के पीछे से उसी का पक्ष लेते हो।
इस शेर में आशिक़ का वह दर्द छलकता है जब वह महबूब के दिल का झुकाव अपने रक़ीब (ग़ैर) की तरफ़ देखता है। जब कभी आशिक़ और किसी तीसरे के बीच तकरार होती है, तो महबूब ज़ाहिर में चाहे चुप रहे, मगर 'दर-पर्दा' यानी दिल के पर्दे के पीछे से उसका सारा समर्थन उसी ग़ैर के साथ होता है। यह उस चुभन की सच्ची तस्वीर है जहाँ आप जानते हैं कि आपका महबूब सिर्फ़ रस्म निभा रहा है, जबकि उसका सच्चा रुझान किसी और के हक़ में है।
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