“Though a thousand charms of earthly beauties tempt you, O Akbar, keep your focus fixed steadfastly upon Him alone.”
ऐ अकबर, चाहे सांसारिक सुंदरियों के सौंदर्य के हज़ारों जलवे मौजूद हों, तुम अपना ध्यान केवल उसी (ईश्वर) की ओर लगाए रखो।
अकबर इलाहाबादी इस शे'र में दिल को सांसारिक आकर्षणों से बचाकर रूहानी सच्चाई की ओर मोड़ने की बड़ी प्यारी नसीहत देते हैं। यहाँ 'हुस्न-ए-बुताँ' दुनिया की उन तमाम ख़ूबसूरत चीज़ों और माशूक़ों का प्रतीक है, जो इंसान का ध्यान भटकाते हैं। शायर समझाते हैं कि चाहे दुनिया का सौन्दर्य कितना भी लुभावना क्यों न हो, एक सच्चे आशिक़ और साधिक को अपना ध्यान सिर्फ़ उसी एक परम प्रिय यानी ईश्वर की ओर लगाए रखना चाहिए।
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