“Within their hearts glows the light of faith, yet its guardian is not strong; lest the winds of cold logic and childish caprice extinguish this tender flame.”
उनके दिलों में ईमान की रोशनी मौजूद है लेकिन उसका रखवाला मज़बूत नहीं है। ऐसा न हो कि तर्क की हवा और बचकानी आदतें इस शमा को बुझा दें।
शायर यहाँ दिल के सच्चे यक़ीन और ईमान को एक नाज़ुक शम्अ की तरह देखते हैं, जो रौशन तो है मगर उसकी हिफ़ाज़त करने वाला कोई मज़बूत पहरेदार नहीं है। एक तरफ़ शुष्क तर्क और कुतर्क की सर्द हवा है, और दूसरी तरफ़ बचकानी नासमझी व ग़फ़लत—ये दोनों ही इस मासूम रोशनी को बुझाने के लिए काफ़ी हैं। यह शेर बड़ी नज़ाकत से समझाता है कि रूहानी जज़्बे को सिर्फ़ महसूस करना काफ़ी नहीं, उसे दुनियावी संदेहों से बचाने के लिए पुख़्ता समझदारी की भी ज़रूरत होती है।
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