बादा-ए-गुल-रंग का साग़र इनायत कर मुझे साक़िया ताख़ीर क्या है अब घटा छाई तो है

“Bestow upon me a goblet of rose-tinted wine; O cupbearer, why the delay, now that dark clouds have gathered?”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मुझे गुलाबी रंग की शराब का प्याला प्रदान करो। ऐ साक़ी, अब किस बात की देर है जब आसमान में घटा छा चुकी है।

विस्तार

उर्दू शायरी में आसमान में काली घटाओं का घिरना जश्न, इश्क़ और मय-नोशी के लिए सबसे माकूल और हसीन मौसम माना जाता है। यहाँ शायर साक़ी से बड़े प्यार और बेताबी से कह रहा है कि अब देर किस बात की, जब कुदरत ने खुद मदहोश कर देने वाला समां बाँध दिया है। यह शेर मौसम के हुस्न और दिल की उमंगों के बीच के खूबसूरत रिश्ते को बयां करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.