यूँ मुरव्वत से तुम्हारे सामने चुप हो रहें कल के जलसों की मगर हम ने ख़बर पाई तो है

“Though out of polite regard I hold my silence before you, yet the tidings of yesterday's revels have reached me all the same.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

हालाँकि हम लिहाज़ और शराफ़त के कारण आपके सामने चुप रहते हैं, लेकिन कल की महफ़िलों की ख़बर तो हमें मिल ही चुकी है।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ की ख़ामोशी उसकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि उसका अदब और लिहाज़ यानी मुरव्वत है। वह महबूब के सामने कोई तमाशा नहीं खड़ा करता, पर नज़ाकत से यह जता देता है कि कल की महफ़िलों की सारी ख़बर उस तक पहुँच चुकी है। यह उस ख़ामोश दर्द की तस्वीर है जहाँ इंसान सब कुछ जानकर भी सिर्फ़ रिश्ते के भरम और गरिमा को बनाए रखने के लिए चुप रह जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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