हर गाम पे चंद आँखें निगराँ हर मोड़ पे इक लेसंस-तलब उस पार्क में आख़िर ऐ 'अकबर' मैं ने तो टहलना छोड़ दिया

“With watchful eyes at every step and a license sought at every turn, in that park at last, O Akbar, I have given up my stroll.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

हर कदम पर कई निगाहें निगरानी कर रही हैं और हर मोड़ पर लाइसेंस माँगा जाता है, इसलिए ऐ अकबर, मैंने उस पार्क में टहलना ही छोड़ दिया।

विस्तार

अकबर इलाहाबादी अपने चुटीले व्यंग्य में दिखाते हैं कि कैसे आधुनिक कायदे-कानून इंसान की सहज आज़ादी को छीन लेते हैं। 'पार्क' यहाँ उस खुली और सुकून भरी ज़िंदगी का प्रतीक है जहाँ इंसान टहलने और ताज़ा हवा लेने आता है, मगर हर कदम पर निगरानी और परमिट की मांग ने उसे कैदखाना बना दिया है। जब सुकून की तलाश ही पहरेदारी में बदल जाए, तो शायर बेबसी और तंज़ के साथ उस पूरी महफ़िल से ही किनारा कर लेना बेहतर समझता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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