“From the cruel archer's deadly flight of arrows, a silence grips the wild: the sweet-singing birds have fallen mute, and the deer has ceased to leap.”
ज़ालिम शिकारी के तीर चलाने से जंगल में एक सन्नाटा छा गया है; मधुर स्वर में गाने वाले पक्षी चुप हो गए हैं और हिरन ने कुलाँचे भरना छोड़ दिया है।
इस शेर में ज़ुल्म की दहशत और उससे पैदा होने वाले खौफ़नाक सन्नाटे का बहुत सजीव मंज़र पेश किया गया है। शिकारी या ज़ालिम के तीरों ने ऐसा कहर बरपाया है कि पूरा जंगल सहम गया है—चहकने वाले परिंदों के सुर थम गए हैं और हिरणों ने अपनी शोख़ कुलांचें भरना छोड़ दिया है। रूपक के तौर पर यह शेर दिखाता है कि जब ज़िंदगी या हुकूमत में सितम हद से बढ़ जाए, तो दुनिया की सारी रौनक़, गीत और उछल-कूद एक गहरे सन्नाटे में बदल जाती है।
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