तलवार ले के उठता है हर तालिब-ए-फ़रोग़ दौर-ए-फ़लक में हैं ये इशारे हिलाल के

“Every seeker of glory rises brandishing a sword; such are the signals of the crescent moon in the turning of the skies.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

तरक्की और बुलंदी चाहने वाला हर शख्स हाथ में तलवार लेकर उठता है, क्योंकि आसमान के चक्कर में नए चाँद (हिलाल) के यही इशारे हैं।

विस्तार

यहाँ शायर ने पहली रात के चाँद यानी हिलाल की वक्र शक्ल की तुलना म्यान से निकली तलवार से की है। फलक पर जब हिलाल चमकता है, तो लगता है मानो आसमान खुद पैग़ाम दे रहा हो कि जिसे भी बुलंदी और शोहरत की चाहत है, उसे मैदान में उतरकर संघर्ष करना होगा। यह शेर कुदरत के एक खूबसूरत मंज़र के ज़रिये इंसानी महत्वाकांक्षा और ताक़त की होड़ को बेहद असरदार अंदाज़ में बयान करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.