“Every seeker of glory rises brandishing a sword; such are the signals of the crescent moon in the turning of the skies.”
तरक्की और बुलंदी चाहने वाला हर शख्स हाथ में तलवार लेकर उठता है, क्योंकि आसमान के चक्कर में नए चाँद (हिलाल) के यही इशारे हैं।
यहाँ शायर ने पहली रात के चाँद यानी हिलाल की वक्र शक्ल की तुलना म्यान से निकली तलवार से की है। फलक पर जब हिलाल चमकता है, तो लगता है मानो आसमान खुद पैग़ाम दे रहा हो कि जिसे भी बुलंदी और शोहरत की चाहत है, उसे मैदान में उतरकर संघर्ष करना होगा। यह शेर कुदरत के एक खूबसूरत मंज़र के ज़रिये इंसानी महत्वाकांक्षा और ताक़त की होड़ को बेहद असरदार अंदाज़ में बयान करता है।
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