हस्ती के हक़ के सामने क्या अस्ल-ए-ईन-ओ-आँ पुतले ये सब हैं आप के वहम-ओ-ख़याल के

“Before the true reality of Being, what essence have 'this' and 'that'? All of these are merely puppets fashioned from your delusion and fancy.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

अस्तित्व के परम सत्य के सामने 'इस' और 'उस' की क्या वास्तविकता है? यह सब तो केवल आपके वहम और कल्पना के बनाए हुए पुतले हैं।

विस्तार

शायर यहाँ सूफ़ी फलसफ़े की गहरी बात बहुत सादगी से समझा रहे हैं कि परम सत्य के सामने इस दुनिया की चीज़ों और फ़र्क़ों की आख़िर क्या बिसात! हम जिन सांसारिक रूपों और भेदों में उलझे रहते हैं, वे दरअसल हमारे अपने मन और वहम की गढ़ी हुई कठपुतलियाँ मात्र हैं। जब इंसान कल्पना और भ्रम के इस पर्दे को हटाकर देखता है, तो यह सारा तमाशा बेमानी हो जाता है और सिर्फ़ एक ही हक़ीक़त नज़र आती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.