ज़ीनत मुक़द्दमा है मुसीबत का दहर में सब शम्अ' को जलाते हैं साँचे में ढाल के

“In this world, adornment is but a prelude to affliction's plight: they cast the candle in an elegant mould, only to set it alight.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

इस दुनिया में ख़ूबसूरती और सजना-संवरना मुसीबत की शुरुआत है; लोग मोमबत्ती को भी पहले साँचे में ढालकर संवारते हैं और फिर उसे जला देते हैं।

विस्तार

शायर यहाँ दुनिया की एक कड़वी हक़ीक़त को बेहद ख़ूबसूरत अंदाज़ में बयां करते हैं कि सजना-संवरना अक्सर आने वाली तकलीफ़ों का पैग़ाम होता है। जैसे मोमबत्ती को पहले बड़े सलीके से सांचे में ढालकर निखारा जाता है, मगर यह सारी सजावट सिर्फ़ इसलिए होती है ताकि आख़िर में उसे आग के हवाले किया जा सके। ज़िंदगी में भी कई बार हमारी ख़ूबसूरती, हुनर या मर्तबा ही हमारे जलने और आज़माइशों का सबब बन जाता है।

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