आप क्या जानें क़द्र-ए-या-अल्लाह जब मुसीबत कोई पड़ी ही नहीं

“What could you ever know of the worth of calling 'O God!', When no misfortune has ever befallen you at all?”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

जब आप पर कभी कोई मुसीबत आई ही नहीं, तो आप 'या अल्लाह' पुकारने की असली क़द्र और अहमियत क्या जानें।

विस्तार

यह शेर इंसान की बेबसी और उसके सच्चे यक़ीन को बड़ी सादगी से बयां करता है। जब ज़िंदगी में सब कुछ आसान हो, तब 'या अल्लाह' कहना महज़ एक रस्मी पुकार लगता है। मगर जब इंसान किसी गहरी मुसीबत में घिरता है, तब दिल के कोने से निकलने वाली इस पुकार की असल ताक़त और सुकून समझ आता है, जिसे हर बला से महफ़ूज़ रहने वाला कभी महसूस नहीं कर सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.