“What could I have said to comfort my heart in this ordeal? / There was simply no precedent of its kind.”
इस मुसीबत में मैं अपने दिल से क्या कहता या उसे कैसे समझाता, क्योंकि तसल्ली देने के लिए पहले से ऐसी कोई मिसाल मौजूद ही नहीं थी।
जब हम किसी गहरे दुख से गुजरते हैं, तो अक्सर दिल को बहलाने के लिए दूसरों की मिसालें देते हैं कि 'ऐसा तो ज़माने में सबके साथ होता है'। मगर शायर पर जो मुसीबत टूटी है, वह इतनी अनोखी और बेमिसाल है कि दिल को तसल्ली देने के लिए कोई सांत्वना या किस्सा बचा ही नहीं। यह शेर इंसान की उस लाचारी और तन्हाई को बयां करता है जहाँ दर्द इतना नया और गहरा हो कि कोई पुराना तजुर्बा काम न आए।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
