चाहता था बहुत सी बातों को मगर अफ़्सोस अब वो जी ही नहीं

“I once yearned for so many things in life, but alas, that longing heart within me is no more.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मैं कभी बहुत सी चीज़ों की ख़्वाहिश रखता था, लेकिन अफ़सोस कि अब वह दिल या चाहत ही बाक़ी नहीं रही।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी की उस उदास ख़ामोशी को बयां करता है जहाँ इंसान की तमाम ख़्वाहिशें दम तोड़ देती हैं। कभी दिल में अनगिनत तमन्नाएँ और उमंगें थीं, मगर वक़्त और हादसों ने उस अंदरूनी जोश को ही बुझा दिया। सबसे बड़ा दुख इस बात का नहीं कि आरज़ू अधूरी रह गई, बल्कि अफ़सोस यह है कि अब कुछ भी चाहने की वो ललक और दिल ही नहीं बचा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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