“The heart is such, it brims with cries at every hour; yet such am I, I let no whisper escape my lips.”
दिल हर समय फ़रियाद और दर्द से भरा रहता है, मगर हम ऐसे हैं कि अपने मुँह से कोई आह या शिकायत बाहर नहीं निकलने देते।
यह शेर दिल के अंदर मचे तूफ़ान और बाहर की खामोशी के बीच की कशमकश को खूबसूरती से बयां करता है। दिल एक ऐसे प्याले की तरह है जो दर्द और फ़रियादों से लबारेज़ है, लेकिन इंसान का सब्र और स्वाभिमान एक भी लफ़्ज़ होंठों से बाहर नहीं आने देता। यह उस गहरे और ख़ामोश दर्द की दास्तान है जहाँ इंसान बिखरने के कगार पर होकर भी अपनी गरिमा और इश्क़ का भरम बनाए रखता है।
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