“Like a slaughtered bird my heart writhed upon the ground; oh, what wondrous power a coquettish glance commands!”
ज़िबह किए हुए परिंदे की तरह मेरा दिल तड़प कर लोट गया, महबूब की नाज़-भरी निगाह का असर भी कितना अनोखा होता है।
इस शेर में शायर महबूब की एक नाज़ भरी निगाह के जानलेवा असर को बड़ी खूबसूरती से बयान कर रहे हैं। उन्होंने दिल की बेताबी की तुलना 'मुर्ग़-ए-बिस्मिल' यानी तड़पते हुए ज़ख्मी परिंदे से की है, जो ज़मीन पर बेचैन होकर लोट रहा हो। यह शेर इश्क़ के उस मीठे दर्द को दिखाता है जहाँ किसी खंजर की ज़रूरत नहीं होती, बस माशूक़ का एक अंदाज़ से देखना ही दिल को बेबस और घायल करने के लिए काफ़ी है।
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