ग़ज़ल

आह जो दिल से निकाली जाएगी

آہ جو دل سے نکالی جائے گی
अकबर इलाहाबादी· Ghazal· 5 shers· radif: जाएगी

यह ग़ज़ल पीड़ित प्रेमी के दिल से निकली आह के असर और उसकी अचूक शक्ति को रेखांकित करती है, जो कभी निष्फल नहीं जाती। इसमें महबूब की नाज़ुकता और उसके सितम के अंतर्विरोध को दर्शाते हुए विरह की गहरी वेदना और चेतावनी का भाव व्यक्त किया गया है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
आह जो दिल से निकाली जाएगी क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी
जो आह दिल की गहराइयों से निकलेगी, क्या तुम समझते हो कि वह व्यर्थ जाएगी और उसका कोई असर नहीं होगा?
2
इस नज़ाकत पर ये शमशीर-ए-जफ़ा आप से क्यूँकर सँभाली जाएगी
आपकी इस कोमलता और नज़ाकत के रहते ज़ुल्म की यह तलवार आपसे कैसे सँभाली जाएगी?
3
क्या ग़म-ए-दुनिया का डर मुझ रिंद को और इक बोतल चढ़ा ली जाएगी
मुझ शराबी को दुनिया के दुखों का क्या डर हो सकता है? अगर कोई ग़म हुआ भी, तो शराब की एक और बोतल पी ली जाएगी।
4
शैख़ की दावत में मय का काम क्या एहतियातन कुछ मँगा ली जाएगी
शैख़ की दावत में शराब का क्या काम है? फिर भी सावधानी के तौर पर थोड़ी सी मँगवा ली जाएगी।
5
याद-ए-अबरू में है 'अकबर' महव यूँ कब तिरी ये कज-ख़याली जाएगी
अकबर महबूब की तिरछी भौंहों की याद में इस तरह डूबा हुआ है कि समझ नहीं आता उसकी यह टेढ़ी सोच कब जाएगी।
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आह जो दिल से निकाली जाएगी | Sukhan AI